Act East Policy UPSC: हिंदी में पूरी समझ
Act East Policy क्या है, कब और कहाँ घोषित हुई, Look East से इसका फर्क, चार C वाले स्तंभ, कलादान और त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएँ, और UPSC प्रीलिम्स-मेन्स में इसका इस्तेमाल कैसे करें। हिंदी में, बिना भारी शब्दों के।
Act East Policy क्या है, कब और कहाँ घोषित हुई, Look East से इसका फर्क, चार C वाले स्तंभ, कलादान और त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएँ, और UPSC प्रीलिम्स-मेन्स में इसका इस्तेमाल कैसे करें। हिंदी में, बिना भारी शब्दों के।
Act East Policy क्या है: सीधा जवाब
Act East Policy भारत की वह विदेश नीति है जिसके तहत भारत दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों से आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक रिश्ते सक्रिय रूप से बढ़ाता है। इसकी औपचारिक घोषणा नवंबर 2014 में म्यांमार के नेपीडॉ में हुई, 12वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 9वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के मौके पर। यह 1991-92 की Look East Policy का अगला चरण है, जिसमें व्यापार के साथ-साथ सुरक्षा सहयोग, भौतिक कनेक्टिविटी और पूर्वोत्तर भारत का विकास भी बराबर का हिस्सा बन गया।
नाम का बदलाव कॉस्मेटिक नहीं था। Look East में भारत मुख्य रूप से बाजार खोज रहा था। Act East में भारत बंदरगाह बना रहा है, नौसैनिक अभ्यास कर रहा है, वीजा नियम ढीले कर रहा है और आसियान के साथ रणनीतिक बातचीत की मेज पर बैठा है। एक वाक्य में कहें तो जोर देखने से करने पर आ गया।
Look East और Act East: फर्क साफ रखें
मेन्स में सबसे आम गलती यह होती है कि अभ्यर्थी दोनों को एक ही चीज बता देते हैं, बस साल बदलकर। परीक्षक इसे पकड़ लेता है। नीचे का ढाँचा याद रखिए, उत्तर में दो-तीन पंक्तियाँ इससे निकल आएँगी।
एक बात ध्यान रखिए। Act East ने Look East को खत्म नहीं किया, उसे चौड़ा किया। आर्थिक जुड़ाव अब भी केंद्र में है, बाकी चीजें उसके ऊपर जुड़ी हैं।
| आधार | Look East (1991-92) | Act East (2014 से) |
|---|---|---|
| संदर्भ | सोवियत संघ का विघटन, भुगतान संतुलन संकट, आर्थिक उदारीकरण | चीन का उभार, हिंद-प्रशांत की राजनीति, पूर्वोत्तर की माँग |
| मुख्य जोर | व्यापार और निवेश | व्यापार, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, संस्कृति |
| भौगोलिक दायरा | मुख्यतः आसियान | आसियान के साथ जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत द्वीप देश |
| घरेलू कड़ी | लगभग नहीं | पूर्वोत्तर भारत को प्रवेश-द्वार मानना |
| शुरुआत | पी. वी. नरसिम्हा राव सरकार | नवंबर 2014, नेपीडॉ, म्यांमार |
चार C, और वह पाँचवाँ जो सब भूल जाते हैं
विदेश मंत्रालय इस नीति को चार C में समझाता है। ये चारों याद रखने लायक हैं क्योंकि इनसे उत्तर का ढाँचा बन जाता है।
- Culture: बौद्ध और रामायण परंपरा, नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्जीवन, आसियान देशों के साथ लोगों का आवागमन।
- Commerce: 2009 में हस्ताक्षरित आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता, जिसकी समीक्षा अभी चल रही है क्योंकि व्यापार संतुलन भारत के विरुद्ध झुका है।
- Connectivity: सड़क, बंदरगाह, हवाई मार्ग और डिजिटल लिंक। यही सबसे कमजोर कड़ी भी है।
- Capacity building: आसियान और मेकांग देशों में प्रशिक्षण केंद्र, ITEC छात्रवृत्तियाँ, अंतरिक्ष और IT सहयोग।
- पाँचवाँ, अघोषित C: China. नीति का पूरा सामरिक तर्क चीन की मौजूदगी के जवाब में बना है, हालाँकि सरकारी दस्तावेज इसे इस तरह नहीं कहते।
जमीन पर क्या चल रहा है, और क्या अटका है
यह हिस्सा उत्तर में उदाहरण देता है, इसलिए दो-तीन परियोजनाओं के नाम, रास्ता और अड़चन याद रखिए। सामान्य बातें लिखने वाले सौ अभ्यर्थियों में एक ठोस उदाहरण देने वाला अलग दिख जाता है।
सबसे बड़ी अड़चन म्यांमार है। फरवरी 2021 के तख्तापलट और उसके बाद के गृहयुद्ध ने कलादान और त्रिपक्षीय राजमार्ग, दोनों की रफ्तार तोड़ दी। चिन राज्य और सागाइंग में लड़ाई के कारण निर्माण रुका, और सीमा पर शरणार्थियों का दबाव बढ़ा। नीति का सबसे कमजोर बिंदु यही है: भारत की पूरी थल-कनेक्टिविटी एक अस्थिर देश से होकर जाती है।
| परियोजना या मंच | क्या है | स्थिति |
|---|---|---|
| कलादान बहुविध परिवहन परियोजना | कोलकाता से सित्तवे बंदरगाह, कलादान नदी से पलेतवा, फिर सड़क से मिजोरम का ज़ोरिनपुई | बंदरगाह चालू, सड़क वाला हिस्सा म्यांमार के संघर्ष से बाधित |
| भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग | मोरे (मणिपुर) से माए सोत (थाईलैंड), लगभग 1360 किमी | कुछ खंड अधूरे, विस्तार की बात कंबोडिया और वियतनाम तक |
| BIMSTEC | बंगाल की खाड़ी के सात देश, सचिवालय ढाका | चार्टर लागू हो चुका, SAARC के ठहराव के बाद भारत की प्राथमिकता |
| मेकांग-गंगा सहयोग | 2000 में वियनतियाने में शुरू, छह देश | संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा पर केंद्रित |
| आसियान-भारत साझेदारी | 2022 में व्यापक सामरिक साझेदारी का दर्जा | संवाद संबंधों के तीन दशक पूरे |
पूर्वोत्तर: नीति का घरेलू चेहरा
Act East का आधा हिस्सा विदेश नीति है, आधा घरेलू विकास नीति। पूर्वोत्तर के आठ राज्य अपनी सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पड़ोसी देशों से साझा करते हैं और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की पतली गर्दन से बाकी भारत से जुड़े हैं। इसलिए सरकार का तर्क है कि अगर पूर्वोत्तर सड़क, रेल और सीमा-व्यापार से जुड़ जाए तो वह अंतिम छोर की जगह प्रवेश-द्वार बन जाएगा।
हकीकत मिली-जुली है। हवाई संपर्क और सड़क परियोजनाओं में सुधार दिखता है, लेकिन सीमा व्यापार के आँकड़े छोटे हैं और मुक्त आवागमन व्यवस्था पर हुए हालिया बदलावों ने म्यांमार से लगी सीमा को और सख्त किया है। उत्तर में यह संतुलन दिखाइए। सिर्फ तारीफ लिखने वाला उत्तर औसत रह जाता है।
परीक्षा में इसका इस्तेमाल कैसे करें
प्रीलिम्स में यह नीति सीधे नहीं पूछी जाती, इसके इर्द-गिर्द की चीजें पूछी जाती हैं। आसियान के सदस्य देश, BIMSTEC में कौन है और कौन नहीं (नेपाल और भूटान हैं, पाकिस्तान नहीं), मेकांग-गंगा सहयोग के सदस्य, सित्तवे बंदरगाह किस नदी के मुहाने पर है, त्रिपक्षीय राजमार्ग किस राज्य से शुरू होता है। यही तथ्य दोहराइए।
मेन्स में GS Paper 2 के अंतर्राष्ट्रीय संबंध वाले हिस्से में यह लगातार आता है, और आमतौर पर तीन कोणों से: Look East से Act East का बदलाव, पूर्वोत्तर के विकास से इसका जुड़ाव, और चीन के मुकाबले भारत की स्थिति। उत्तर का ढाँचा सीधा रखिए। एक पैराग्राफ नीति के तर्क का, एक उपलब्धियों का ठोस उदाहरणों के साथ, एक कमजोरियों का (म्यांमार की अस्थिरता, आसियान के साथ व्यापार घाटा, RCEP से भारत का बाहर रहना), और अंत में आगे का रास्ता।
इस विषय की दिक्कत यह है कि यह हर महीने बदलता है। शिखर सम्मेलन होते हैं, घोषणापत्र आते हैं, परियोजनाओं की तारीखें खिसकती हैं। रोज अखबार से नोट्स बनाने का समय न हो तो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध Current Affairs Magazines जैसे एक तयशुदा स्रोत से महीने में एक बार अपडेट कर लेना ज्यादा टिकाऊ पड़ता है, क्योंकि इसमें MEA और PIB की सामग्री एक जगह आ जाती है।
एक आखिरी बात। Act East को रटी हुई नीति की तरह मत पढ़िए, नक्शे के साथ पढ़िए। सित्तवे, पलेतवा, ज़ोरिनपुई, मोरे, माए सोत, इन पाँच नामों को नक्शे पर एक बार खुद ढूँढ लीजिए। उसके बाद यह नीति भूलेगी नहीं।
FAQs
1. Act East Policy की घोषणा किसने और कब की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2014 में म्यांमार के नेपीडॉ में 12वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान इसकी घोषणा की। यह 1991-92 में शुरू हुई Look East Policy का विस्तारित रूप है।
2. Act East Policy और Neighbourhood First में क्या अंतर है?
Neighbourhood First भारत के तत्काल पड़ोसियों, यानी नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान पर केंद्रित है। Act East का दायरा दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र है। म्यांमार दोनों नीतियों में आता है, इसलिए वह सबसे अहम कड़ी है।
3. कलादान परियोजना अभी तक पूरी क्यों नहीं हुई?
सित्तवे बंदरगाह और नदी मार्ग का काम हो चुका है, लेकिन पलेतवा से मिजोरम तक का सड़क खंड म्यांमार के चिन क्षेत्र में चल रहे सशस्त्र संघर्ष के कारण अटका है। 2021 के तख्तापलट के बाद सुरक्षा हालात बिगड़ने से समय-सीमा कई बार बढ़ी है।
4. भारत RCEP से बाहर क्यों रहा और क्या यह Act East के खिलाफ जाता है?
भारत 2019 में RCEP से बाहर हो गया, मुख्य वजहें थीं चीन से सस्ते आयात की आशंका, डेयरी और कृषि क्षेत्र की चिंता और व्यापार घाटा। मेन्स में इसे नीति के विरोधाभास के उदाहरण के तौर पर लिखा जा सकता है, क्योंकि आर्थिक जुड़ाव Act East का मुख्य स्तंभ है।
5. BIMSTEC, Act East Policy में कहाँ फिट होता है?
BIMSTEC बंगाल की खाड़ी के सात देशों का समूह है और यह दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है, इसलिए यह Act East और Neighbourhood First, दोनों का मिलन-बिंदु है। SAARC के ठप पड़ने के बाद भारत ने इसे क्षेत्रीय सहयोग का मुख्य मंच बनाया है।
6. क्या Act East Policy पर हिंदी माध्यम से उत्तर लिखने में नुकसान होता है?
नहीं, बशर्ते संस्थाओं और परियोजनाओं के नाम अंग्रेजी रूप में ही लिखें, जैसे ASEAN, BIMSTEC, कलादान, त्रिपक्षीय राजमार्ग। अनुवाद करके गढ़े गए नाम भ्रम पैदा करते हैं, बाकी विश्लेषण हिंदी में लिखना पूरी तरह ठीक है।