Neighbourhood First Policy UPSC: हिंदी में पूरी समझ
नेइबरहुड फर्स्ट पॉलिसी का सीधा अर्थ, इसके मुख्य तत्व, आठ पड़ोसी देशों की मौजूदा स्थिति, नीति की असली दिक्कतें, और GS पेपर 2 में इस पर उत्तर लिखने का ढाँचा। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए।
नेइबरहुड फर्स्ट पॉलिसी का सीधा अर्थ, इसके मुख्य तत्व, आठ पड़ोसी देशों की मौजूदा स्थिति, नीति की असली दिक्कतें, और GS पेपर 2 में इस पर उत्तर लिखने का ढाँचा। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए।
सीधा जवाब: नेइबरहुड फर्स्ट पॉलिसी क्या है
नेइबरहुड फर्स्ट (पड़ोसी प्रथम) भारत की वह विदेश नीति दृष्टि है जिसमें तात्कालिक पड़ोसियों को कूटनीति में सबसे ऊपर रखा जाता है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान, ये आठ देश इसके दायरे में आते हैं। इसकी औपचारिक शुरुआत मई 2014 में मानी जाती है, जब प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण में सभी SAARC नेताओं को बुलाया गया था। यही संकेत नीति का नाम बन गया।
विचार नया नहीं है। 1996-97 में गुजराल सिद्धांत ने यही बात कही थी कि छोटे पड़ोसियों से भारत बदले में बराबर की अपेक्षा न रखे, यानी non-reciprocity। नेइबरहुड फर्स्ट ने उस भावना को लेकर उसमें कनेक्टिविटी, ऊर्जा, और आपदा राहत जैसे ठोस औजार जोड़ दिए। परीक्षा के लिए यह जोड़ याद रखिए: गुजराल सिद्धांत भाव है, नेइबरहुड फर्स्ट अमल है।
नीति के असली तत्व, नारों से हटकर
अगर आप इस नीति को केवल "पड़ोसियों से अच्छे संबंध" लिखकर छोड़ देंगे, तो उत्तर औसत रहेगा। परीक्षक ठोस साधन देखना चाहता है। ये पाँच याद रखिए।
- असममित उदारता: भारत बदले की अपेक्षा किए बिना पहले देता है। 2015 का भूमि सीमा समझौता (100वाँ संविधान संशोधन) इसका सबसे साफ उदाहरण है, जिसमें बांग्लादेश के साथ एन्क्लेव की अदला-बदली हुई।
- कनेक्टिविटी: सड़क, रेल, बिजली ग्रिड, पेट्रोलियम पाइपलाइन (मोतिहारी से अमलेखगंज, 2019), और BBIN मोटर वाहन समझौता (2015)।
- पहला उत्तरदाता (First Responder): 2015 नेपाल भूकंप में ऑपरेशन मैत्री, और जनवरी 2021 में वैक्सीन मैत्री, जिसकी पहली खेप भूटान और मालदीव गई।
- आर्थिक जीवनरेखा: 2022 के श्रीलंका संकट में भारत ने क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप और ईंधन मिलाकर लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता दी।
- समुद्री विस्तार: 2015 में मॉरीशस में घोषित SAGAR (Security and Growth for All in the Region), जो नेइबरहुड फर्स्ट का हिंद महासागर वाला चेहरा है।
देश-वार स्थिति: एक नज़र में
मेन्स में उदाहरण के बिना तर्क खाली लगता है। हर देश के साथ एक मुद्दा और एक तारीख याद रखिए, इतना काफी है।
| देश | मुख्य सहयोग | मुख्य तनाव या घटना |
|---|---|---|
| नेपाल | जलविद्युत, पेट्रोलियम पाइपलाइन, रुपे भुगतान | कालापानी-लिपुलेख विवाद, जून 2020 का नया नक्शा |
| भूटान | सबसे भरोसेमंद साझेदार, जलविद्युत, सबसे बड़ी सहायता प्राप्तकर्ता | डोकलाम 2017, चीन-भूटान सीमा वार्ता |
| बांग्लादेश | भूमि सीमा समझौता 2015, बिजली आपूर्ति, व्यापार | तीस्ता जल बँटवारा अटका, अगस्त 2024 का सत्ता परिवर्तन |
| श्रीलंका | 2022 संकट में सहायता, ऊर्जा और डिजिटल परियोजनाएँ | मछुआरों का मुद्दा, 13वाँ संशोधन, चीनी जहाजों का ठहराव |
| मालदीव | 1988 ऑपरेशन कैक्टस, बुनियादी ढाँचा, ग्रेटर माले परियोजना | 2023 का 'India Out' अभियान, 2024 में भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी |
| म्यांमार | कलादान परियोजना, पूर्वोत्तर की सुरक्षा | फरवरी 2021 का तख्तापलट, फ्री मूवमेंट रिजीम पर पुनर्विचार |
| अफगानिस्तान | विकास परियोजनाएँ, गेहूँ और दवा सहायता | अगस्त 2021 में तालिबान की वापसी, 2022 से तकनीकी टीम |
| पाकिस्तान | व्यावहारिक रूप से नीति से बाहर | अप्रैल 2025 पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि स्थगन |
नीति कहाँ फँसती है
यह नीति काम करती है, लेकिन एकतरफा नहीं चलती। तीन ढाँचागत दिक्कतें हैं और उत्तर में इन्हें नाम से लिखना चाहिए।
पहली, चीन। ऋण, बंदरगाह और परियोजनाओं के ज़रिये बीजिंग ने हर पड़ोसी को एक विकल्प दे दिया है। CPEC इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, और उस पर भारत की आपत्ति संप्रभुता से जुड़ी है। इस हिस्से को अलग से पढ़ना हो तो What Is the China Pakistan Economic Corridor? देख लीजिए।
दूसरी, घरेलू राजनीति। मालदीव और बांग्लादेश दोनों में सरकार बदलने पर भारत को लेकर रुख बदला। यानी भारत का संबंध कई बार सरकार से बनता है, समाज से नहीं। यह कमज़ोरी है।
तीसरी, अमल की सुस्ती। परियोजनाएँ घोषित होती हैं, पूरी देर से होती हैं। कलादान 2008 से चल रही है। और एक बात साफ कह देता हूँ: SAARC 2014 के बाद से व्यावहारिक रूप से मृत है, इसीलिए भारत ने BIMSTEC को आगे किया, जिसके नेता 2019 के शपथ ग्रहण में बुलाए गए थे।
GS पेपर 2 में इसे कैसे लिखें
UPSC इस विषय पर सीधे "नेइबरहुड फर्स्ट पर चर्चा करें" जैसा प्रश्न कम पूछता है। वह द्विपक्षीय रूप से घुमाकर पूछता है। 2017 में पूछा गया था कि चीन अपने व्यापार अधिशेष का उपयोग एशिया में सैन्य शक्ति बनने के लिए कर रहा है, इसका पड़ोसी भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 2013 में अफगानिस्तान से ISAF की वापसी के क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभाव पूछे गए थे। पैटर्न यही है: नीति का नाम आपसे अपेक्षित है, प्रश्न देश-विशेष होगा।
ढाँचा सरल रखिए। परिचय में नीति की एक पंक्ति परिभाषा और 2014 का संदर्भ। मुख्य भाग में दो हिस्से, उपलब्धियाँ और सीमाएँ, हर बिंदु के साथ एक देश और एक तारीख। निष्कर्ष में आगे का रास्ता, जैसे परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्ति, लोगों से लोगों का संपर्क, और सत्ता-निरपेक्ष कूटनीति। नक्शा-आधारित एक छोटा चित्र बना दें तो और अच्छा।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह टॉपिक हर महीने बदलता है। मालदीव पर आपका 2023 का नोट अब गलत है। इसलिए स्टैटिक हिस्सा एक बार बना लें और उसके ऊपर मासिक अपडेट चढ़ाते रहें। हिंदी माध्यम में यह काम आसान नहीं होता, और यहीं Current Affairs Magazines जैसे एक ही व्यवस्थित स्रोत से काम चल जाता है, जिसमें MEA और PIB की सामग्री हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में मिलती है।
एक आखिरी बात। इस नीति पर लिखते समय भारत को दानदाता की तरह पेश करने की गलती न करें। जो उत्तर यह मानता है कि छोटे पड़ोसियों के पास भी विकल्प हैं और वे उनका उपयोग करते हैं, वही उत्तर परिपक्व दिखता है।
FAQs
1. नेइबरहुड फर्स्ट पॉलिसी और गुजराल सिद्धांत में अंतर क्या है?
गुजराल सिद्धांत (1996-97) पाँच सूत्रों वाला एक विचार था, जिसका मूल यह था कि भारत छोटे पड़ोसियों से बदले में बराबर रियायत न माँगे। नेइबरहुड फर्स्ट उसी भावना को कनेक्टिविटी, ऊर्जा, आपदा राहत और वित्तीय सहायता जैसे ठोस कार्यक्रमों के ज़रिये लागू करने वाली नीति है।
2. क्या पाकिस्तान नेइबरहुड फर्स्ट पॉलिसी में शामिल है?
भौगोलिक रूप से हाँ, व्यावहारिक रूप से नहीं। सीमा पार आतंकवाद के कारण संबंध ठप हैं, और अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय लिया।
3. SAGAR पहल नेइबरहुड फर्स्ट से कैसे जुड़ी है?
SAGAR यानी Security and Growth for All in the Region, जिसकी घोषणा 2015 में मॉरीशस में हुई थी, हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत की समुद्री दृष्टि है। इसे नेइबरहुड फर्स्ट का समुद्री विस्तार माना जाता है, जिसमें मालदीव, श्रीलंका, मॉरीशस और सेशेल्स जैसे देश आते हैं।
4. प्रीलिम्स में इस टॉपिक से क्या पूछा जा सकता है?
तथ्यात्मक बातें, जैसे BBIN में कौन-कौन देश हैं, कलादान परियोजना किन राज्यों और देशों को जोड़ती है, भूमि सीमा समझौता किस संविधान संशोधन से हुआ (100वाँ), और BIMSTEC का मुख्यालय कहाँ है (ढाका)।
5. SAARC के कमज़ोर होने से नेइबरहुड फर्स्ट पर क्या असर पड़ा?
2014 के काठमांडू शिखर सम्मेलन के बाद कोई SAARC शिखर बैठक नहीं हुई, इसलिए भारत ने बहुपक्षीय ज़ोर BIMSTEC और द्विपक्षीय संबंधों पर डाल दिया। नीति खत्म नहीं हुई, उसका मंच बदल गया।
6. हिंदी माध्यम से IR की तैयारी में सबसे बड़ी दिक्कत क्या है?
स्रोत की। ज़्यादातर प्राथमिक सामग्री, जैसे MEA की संयुक्त वक्तव्य और वार्षिक रिपोर्ट, अंग्रेज़ी में आती है, इसलिए हिंदी अभ्यर्थी को एक भरोसेमंद अनूदित मासिक स्रोत तय कर लेना चाहिए और उसी पर टिकना चाहिए।