Indian Economy

Zero Budget Natural Farming UPSC: हिंदी में पूरी समझ

शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) क्या है, इसके चार स्तंभ कौन से हैं, आंध्र प्रदेश से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन तक इसका सफर, उपज पर उठे सवाल, और UPSC मेन्स GS3 में इसे लिखने का साफ ढांचा। हिंदी में, तथ्यों और तारीखों के साथ।

शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) क्या है, इसके चार स्तंभ कौन से हैं, आंध्र प्रदेश से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन तक इसका सफर, उपज पर उठे सवाल, और UPSC मेन्स GS3 में इसे लिखने का साफ ढांचा। हिंदी में, तथ्यों और तारीखों के साथ।

एक लाइन में जवाब

शून्य बजट प्राकृतिक खेती (Zero Budget Natural Farming, ZBNF) खेती का वह तरीका है जिसमें बाहर से खरीदी गई कोई चीज़ नहीं डाली जाती, न रासायनिक खाद, न कीटनाशक, न बाज़ार से लाई गई जैविक खाद। इसकी जगह खेत और देसी गाय से बने घोल इस्तेमाल होते हैं, जिससे लागत लगभग शून्य हो जाती है और किसान कर्ज़ के चक्र से बाहर निकलता है। इसे महाराष्ट्र के कृषि वैज्ञानिक सुभाष पालेकर ने 1990 के दशक में विकसित किया, और उन्हें 2016 में पद्मश्री मिला।

नाम में ही एक दिक्कत है, जिसे परीक्षा भी पकड़ती है। बजट पूरी तरह शून्य नहीं होता। श्रम, गाय का रखरखाव और अपनी ज़मीन की लागत मौजूद रहती है। पालेकर का तर्क यह था कि यह लागत खेत के भीतर से आती है, इसलिए किसान को नकद बाहर नहीं देना पड़ता। यही कारण है कि सरकारी दस्तावेज़ों में अब "शून्य बजट" शब्द कम और "प्राकृतिक खेती" ज़्यादा दिखता है।

चार स्तंभ, जो प्रीलिम्स में सीधे पूछे जा सकते हैं

ZBNF का पूरा ढांचा चार स्तंभों पर खड़ा है। इनके नाम और काम याद रखिए, क्योंकि प्रीलिम्स में मैचिंग टाइप प्रश्न इसी तरह बनते हैं। जीवामृत को खाद न समझिए। वह पोषक तत्व नहीं देता, वह मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करता है, ताकि मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्व पौधे को उपलब्ध हो जाएं। यह अंतर मेन्स में एक अंक का फर्क डाल देता है।

स्तंभइसमें क्याक्या करता है
जीवामृतदेसी गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, दाल का आटा, मुट्ठी भर मिट्टी, पानीमिट्टी में सूक्ष्मजीव बढ़ाता है, पोषक तत्वों को उपलब्ध बनाता है
बीजामृतगोबर, गोमूत्र, चूनाबीज उपचार, बीजजनित रोगों से बचाव
आच्छादन (मल्चिंग)फसल अवशेष, पुआल, सजीव फसल आवरणनमी बचाता है, तापमान संतुलित रखता है, ह्यूमस बनाता है
व्हापासामिट्टी में नमी और हवा का संतुलनसिंचाई की ज़रूरत घटाता है, बार-बार पानी देने से बचाता है

नीति का सफर: तारीखें जो उत्तर में वज़न डालती हैं

यही हिस्सा उत्तर को सामान्य से अलग बनाता है। आंध्र प्रदेश ने 2016 में रायथु साधिकार संस्था (RySS) के ज़रिये इसे बड़े पैमाने पर शुरू किया और आज यह APCNF यानी आंध्र प्रदेश कम्युनिटी मैनेज्ड नैचुरल फार्मिंग के नाम से दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा कार्यक्रम है। इसी कार्यक्रम को 2024 का गुलबेंकियन प्राइज़ फॉर ह्यूमैनिटी मिला, जो अंतरराष्ट्रीय मान्यता का ठोस उदाहरण है। हिमाचल प्रदेश ने 2018 में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना चलाई। जुलाई 2019 के बजट भाषण में केंद्र ने पहली बार इसका ज़िक्र किया।

नवंबर 2024 में कैबिनेट ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) को मंज़ूरी दी। कुल परिव्यय 2481 करोड़ रुपये, लक्ष्य 15,000 क्लस्टर, एक करोड़ किसान, 7.5 लाख हेक्टेयर और 10,000 जैव-निवेश संसाधन केंद्र (BRC)। इससे पहले यह परंपरागत कृषि विकास योजना के भीतर भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP) के रूप में चलती थी, इसलिए दोनों नामों का रिश्ता याद रखिए। ये आंकड़े हर साल हिलते हैं, और NMNF के लक्ष्य, कवरेज और मूल्यांकन रिपोर्टें अब नियमित खबर बन गई हैं, तो एक भरोसेमंद संकलन साथ रखना समझदारी है, जैसे Current Affairs Magazines जिसमें PIB और योजना जैसी सरकारी सामग्री एक जगह मिल जाती है।

वर्षघटना
2016आंध्र प्रदेश में RySS के तहत ZBNF की शुरुआत
2018हिमाचल प्रदेश: प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना
जुलाई 2019केंद्रीय बजट भाषण में शून्य बजट खेती का उल्लेख
2020PKVY के अंतर्गत BPKP उपयोजना
नवंबर 2024राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को कैबिनेट मंज़ूरी, 2481 करोड़ रुपये
2024APCNF को गुलबेंकियन प्राइज़ फॉर ह्यूमैनिटी

आलोचना को हल्के में न लें

अगर आपका उत्तर सिर्फ फायदे गिनाता है, तो वह औसत उत्तर है। ICAR के परीक्षणों में शुरुआती वर्षों में गेहूं और बासमती धान की उपज परंपरागत तरीके से कम पाई गई, और कृषि वैज्ञानिकों की संस्थाओं ने बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले वैज्ञानिक जांच की मांग रखी। खाद्य सुरक्षा का सवाल यहीं से आता है। भारत को 140 करोड़ लोगों के लिए अनाज चाहिए, और उपज में 20 प्रतिशत की गिरावट भी गंभीर है।

दूसरी दिक्कत व्यावहारिक है। पर्याप्त देसी गाय, गोबर और श्रम हर छोटे किसान के पास नहीं है। तीसरी दिक्कत बाज़ार की है, क्योंकि प्राकृतिक खेती के उत्पाद के लिए कोई मज़बूत प्रमाणन और अलग मंडी व्यवस्था अभी बन रही है। श्रीलंका का 2021 का अनुभव सबसे उपयोगी चेतावनी है, जहां रातोंरात रासायनिक खाद पर पाबंदी लगी और चावल तथा चाय उत्पादन गिर गया। सबक यह है कि दिशा और गति दो अलग चीज़ें हैं।

एक और बात, जो कम लोग लिखते हैं। पालेकर स्वयं राज्यों के संस्करणों से असहमत रहे और उनका आग्रह था कि उनकी पद्धति को उसके मूल रूप में ही अपनाया जाए। यह नीति और मूल प्रवर्तक के बीच के तनाव को दिखाता है, और एक अच्छा आलोचनात्मक वाक्य बनता है।

मेन्स में इसे कैसे लिखें

GS3 में यह विषय तीन जगहों से आता है, कृषि लागत और किसान आय, सतत विकास और पर्यावरण, और खाद्य सुरक्षा। प्रश्न सीधा "ZBNF पर चर्चा कीजिए" नहीं आएगा। वह इस तरह आएगा कि रासायनिक उर्वरक सब्सिडी का बोझ, मिट्टी की सेहत और किसान की शुद्ध आय, इन तीनों को जोड़कर उत्तर मांगेगा।

मेरा सुझाव यह ढांचा है। पहले परिभाषा और चार स्तंभ दो पंक्तियों में। फिर आंध्र प्रदेश और NMNF का एक ठोस आंकड़ा। इसके बाद लाभ पक्ष, जिसमें लागत में कमी, उर्वरक सब्सिडी पर दबाव कम होना, मिट्टी में कार्बन बढ़ना और पानी की बचत आएगी। फिर आलोचना, जिसमें उपज के प्रमाण, गाय की उपलब्धता, प्रमाणन और श्रीलंका का उदाहरण। अंत में संतुलित निष्कर्ष, कि प्राकृतिक खेती को वर्षा आधारित और कम उपज वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता से बढ़ाया जाए, और पंजाब-हरियाणा जैसे अन्न कटोरे में चरणबद्ध तरीके से, कड़े मूल्यांकन के साथ।

एक चीज़ जो मैं कॉपियों में बार-बार देखता हूं, वह है जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को एक मान लेना। जैविक खेती में बाहर से खरीदी गई जैविक खाद, वर्मीकम्पोस्ट और जैव कीटनाशक चलते हैं, प्राकृतिक खेती में सिद्धांत रूप में कुछ भी बाहर से नहीं आता। यह एक वाक्य आपके उत्तर को परीक्षक की नज़र में तुरंत अलग कर देता है। बस इतना अंतर साफ लिख दीजिए, और बाकी उत्तर अपने आप जगह पर बैठ जाएगा।

FAQs

1. प्राकृतिक खेती और जैविक खेती में मुख्य अंतर क्या है?

जैविक खेती में बाहर से खरीदी गई जैविक खाद, वर्मीकम्पोस्ट और जैव कीटनाशक इस्तेमाल किए जा सकते हैं, यानी लागत बनी रहती है। प्राकृतिक खेती में सिद्धांत रूप में कोई भी बाहरी निवेश नहीं आता, सब कुछ खेत और देसी गाय से बनाया जाता है।

2. जीवामृत कैसे बनाया जाता है?

देसी गाय का गोबर और गोमूत्र, गुड़, किसी दाल का आटा, मुट्ठी भर उपजाऊ मिट्टी और पानी मिलाकर कुछ दिन छाया में रखा जाता है। यह खाद नहीं है, यह मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करने वाला घोल है।

3. क्या ZBNF से फसल की उपज घटती है?

ICAR के कुछ परीक्षणों में शुरुआती वर्षों में गेहूं और बासमती धान की उपज परंपरागत खेती से कम मिली, जबकि आंध्र प्रदेश के कई क्लस्टरों में लागत घटने से किसान की शुद्ध आय बढ़ी बताई गई। इसलिए सही उत्तर यह है कि प्रमाण मिश्रित हैं और दीर्घकालिक आंकड़े अभी बन रहे हैं।

4. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लक्ष्य क्या हैं?

नवंबर 2024 में मंज़ूर इस मिशन का परिव्यय 2481 करोड़ रुपये है, और लक्ष्य 15,000 क्लस्टरों में एक करोड़ किसानों तक पहुंचना, 7.5 लाख हेक्टेयर को कवर करना और 10,000 जैव-निवेश संसाधन केंद्र खोलना है।

5. क्या सरकार अब भी "शून्य बजट" शब्द इस्तेमाल करती है?

नहीं, केंद्र सरकार के हाल के दस्तावेज़ों में "प्राकृतिक खेती" शब्द चलता है, क्योंकि श्रम और गाय के रखरखाव की लागत को देखते हुए बजट को वास्तव में शून्य कहना सही नहीं था।

6. इस विषय पर उत्तर में कौन सा उदाहरण सबसे कारगर है?

आंध्र प्रदेश का APCNF कार्यक्रम, जिसे 2024 में गुलबेंकियन प्राइज़ फॉर ह्यूमैनिटी मिला, सकारात्मक उदाहरण के लिए सबसे मज़बूत है। सावधानी के पक्ष में श्रीलंका का 2021 का उर्वरक प्रतिबंध और उसके बाद उत्पादन में गिरावट सबसे स्पष्ट उदाहरण है।

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